Jovial Talent: Hindi Kavita
Hindi Kavita लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Hindi Kavita लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

तन्हाइयां | Tanhaiyaan | Hindi Kavita | Jovial Talent


 ये तन्हाइयां...मेरी कलम से



Hindi poem by Jovial Talent


ये तन्हाइयां हमेशा ही तेरा साथ निभाती हैं,

निःस्वार्थ भावना से तुझे गले से लगाती हैं।


परेशानियों में जब तेरी आँखें हैं डबडबाती,

ये तन्हाइयां तुम्हें अपने आगोश में ले लेतीं।


जब कभी तेरे अपनों ने तुझको ठुकराया,

तन्हाइयों ने आकर तुझे गले से लगाया।


जब भी तेरे अपनों ने तेरा साथ ना निभाया,

तन्हाइयों ने आकर अपना दामन बिछाया।


जब कभी किसी ने तेरा मनोबल गिराया,

तनहाइयों ने आकर तेरा ढाँढस बँधाया।


Hindi poem by Jovial Talent


ज़िन्दगी के जिन मीठी यादों को तुमने खोया,

तनहाइयों ने वो यादें अपने पास है संजोया।


पर तनहाइयों से सबने सिर्फ स्वार्थ है निभाया,

खुशियों में कभी इसको साझेदार ना बनाया।


तन्हाइयां ही देती हैं तेरे ग़म में तुझको 'तृप्ति',

न जाने क्यों तू चाहता है इन तनहाइयों से मुक्ति।


                             --- तृप्ति श्रीवास्तव

औरत का मर्म | Hindi Kavita | काव्य रचना | Jovial Talent

 

काश कभी तुम समझ सको....मेरी कलम से



Jovial Talent


अपने सपनों का दमन किया,

तेरे सपनों को नमन किया।

अपने सारे कर्तव्यों का मैंने,

हँसते-हँसते निर्वहन किया।।


अब मैं भी थोड़ी क्षीण हो गई, 

शायद तुम्हें ये ध्यान ही नहीं।

मेरी भी तो उम्र ढल गई, 

इस बात से तुम अनजान नहीं।।


कभी तो मैं भी थकती हूँगी,

काश कभी यह महसूस करो।

दुखते होंगे पाँव भी मेरे,

काश ये तुम एहसास करो।।


भूख मुझे भी लगती होगी,

कभी तो तुमको ख़्याल रहे।

मेरी पसंद और नापसंद से,

तुम हमेशा ही अनजान रहे।।


नही चाहती मैं ये तुमसे,

कि तुम मुझ पर अभिमान करो।

पर नही चाहती ये भी तुमसे,

कि तुम मेरा अपमान करो।।


कुछ मेरे भी तो अरमां होंगे,

काश कभी ये जान सको।

मेरे आत्मसम्मान की गरिमा को,

तुम भी शायद पहचान सको।।


Hindi poem by jovial talent


क्यों खुद से मैं बातें करती,

शायद ये तुम्हें मालूम नहीं।

कभी तो पल भर साथ में बैठो,

मैं इतनी भी नादान नहीं।।


खुद को तुझमें ही विलीन कर दिया,

फिर भी तुझको 'तृप्ति' ना मिली।

कुछ अनसुलझे व अनजाने प्रश्नों से,

अबतक भी मुझको मुक्ति ना मिली।।


                ---  तृप्ति श्रीवास्तव

याद आती है मुझे | Hindi Kavita | Jovial talent | Hindi Poem


याद आती है मुझे......मेरी कलम से 




याद आती है मुझे, गुजरे जमाने की वो धुंधली तस्वीर...

वो रातों को जगना,
अरमानों को पंख लगाना,
निंदिया को भगाकर,
किताबों को जगह देना।


याद आती है मुझे अब भी मेरे नाम की वो पुकार...

वो तालियों का गूंजना,
सफलता के कदम चूमना,
पुरस्कारों के साथ तस्वीरें खिंचवाना,
उत्साह से बड़ों का आशीर्वाद लेना।






वक़्त ने कुछ इस तरह मुझसे सौदा किया....

अब नही मेरा वो नाम था,
ना ही अरमान था,
अब ना ही वो 'तृप्ति' थी,
ना ही वो चैन था।


आईने से पूछा करती यही मैं बार-बार...

मेरा वो नाम कहाँ गुम हो गया,
मेरा वो सम्मान मुझे क्यों छोड़ गया,
अरमानों ने अपना क्यों पंख कुतर दिया,
नींदों की जगह क्यों करवटों ने ले लिया।

                       --  तृप्ति श्रीवास्तव