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आइये जानते हैं कि आखिर क्या है 'निपाह वायरस' ?

निपाह - एक खतरनाक वायरस

भारत में 'निपाह वायरस' को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है, 'निपाह वायरस' एक तरह का संक्रमित रोग है। मेडिकल टर्म में इसे NiV भी कहा जाता है।  निपाह मनुष्‍यों और जानवरों में फैलने वाला एक गंभीर इंफेक्‍शन (वायरस) है। यह वायरस एन्सेफलाइटिस का कारण होता है, इसलिए इसे 'निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस' भी कहा जाता है! 'निपाह वायरस' हेंड्रा वायरस से संबंधित है। यह इंफेक्‍शन फ्रूट बैट्स यानी फल खाने वाले चमगादड़ के जरिए फैलता है।


Nipah Virus
Nipah virus

यह वायरस एक जानवर से फलों में और फलों के जरिए व्यक्तियों में फैलता है। इस गंभीर संक्रमण की चपेट में आने से इंसान की मौत भी हो सकती है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अभी तक इस बीमारी का कोई सटिक इलाज भी नहीं हैं। बचाव के जरिए ही इससे दूर रहा जा सकता है।
यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है यानि 'निपाह वायरस' चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों में फैलता है। इस खतरनाक वायरस के एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने का भी डर रहता है। खजूर के खेतों में काम करने वालों में 'निपाह वायरस' फैलने का खतरा ज्यादा होता है, जिससे मौत भी हो सकती है। फ्रूट बैट प्रजाति के चमगादड़ इस संक्रमण को तेजी फैलाते हैं। इसकी वजह यह है कि यह एक मात्र स्तनधारी है जो उड़ सकता है। पेड़ पर लगे फलों को खाकर संक्रमित कर देता है। जब पेड़ से गिरे इन संक्रमित फलों को इंसान खा लेता है तो वह बीमारी की चपेट में आ जाता है।


निपाह वायरस' के लक्षण


'निपाह वायरस' की चपेट में आने वाले इंसान को तेज बुखार,दिमाग या सिर में तेज जलन,दिमाग में सूजन और दर्द,मानसिक भ्रम, सांस लेने में परेशानी होती है। संक्रमण बढ़ने से मरीज कोमा में भी जा सकता है, इसके बाद इंसान की मौत हो जाती है। ये वायरस एन्सेफलाइटिस सिड्रोम के जरिए बहुत तेजी से फैलता है।
यह रेसपायरी और सेंट्रल नर्वस सिस्टम को अफेक्ट करता है।

फैलता है ये वायरस

जैसा कि इस वायरस से निपटने के ल‍िए कोई वैक्‍सीन का ईजाद नहीं किया है, ये वायरस फैलने वाला संक्रमण है, इसलिए इस वायरस से संक्रमित व्‍यक्ति से दूरी बनाकर चलना चाहिए। इस वायरस से बचाव के लिए रिबावायरिन नामक दवाई का इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

तीन तरह से फैलता है ये वायरस
-इंफेक्टेड चमगादड़ के संपर्क में आने से।
-इंफेक्टेड पिग के संपर्क में आने से।
-वायरस से इंफेक्टेड पेशेंट के संपर्क में आने से।

ऐसे इंसानों तक पहुंच रहा है ये वायरस...

- निपाह वायरस से इन्फेक्टेड चमगादड़ या कोई और पक्षी किसी फल पर चोंच मारता है या खाता है, तो ये वायरस फ्रूट में आ जाता है। ये फल कोई भी हो सकता है।

- वायरस वाला फ्रूट मार्केट से आपके घर तक पहुंच सकता है। अगर आप इन्हें खा लेते हैं तो आप भी निपाह वायरस के शिकार हो सकते हैं।

- यदि किसी सूअर में यह वायरस है तो उसके जरिए भी इसका इन्फेक्शन आप तक पहुंच सकता है।

- इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति इस वायरस से इन्फेक्टेड है और आप उसके संपर्क में आते हैं तो आप इसके शिकार हो जाएं।

निपाह वायरस' से बचाव

खजूर के फल को खाने से परहेज करना चाहिए।पेड़ से गिरे फल को नहीं खाना चाहिए।
निपाह के संक्रमित रोगी से दूरी बनाएसुअर और चमगादड़ों से दूर रहें ।
बिना धूले फल ना खाएं। बाहर के कटे फल और जूस से भी परहेज करें।

इन बातों का रखे खास ख्‍याल ...

खाना खाते हुए इस बात का ध्‍यान रखें कि आप जो खाना खा रहे हैं वह किसी चमगादड़ या उसके मल से दूषित नहीं हुआ हो। चमगादड़ के कुतरे हुए फल न खाएं।
खजूर के पेड़ के पास खुले कंटेनर में बनी टोडी शराब पीने से बचें।
बीमारी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति से संपर्क न करें। यदि मिलना ही पड़े तो बाद में साबुन से अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें।
इस बीमारी से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए।
बीमार सुअर और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
आमतौर पर शौचालय में इस्तेमाल होने वाली चीजें, जैसे बाल्टी और मग को खास तौर पर साफ रखें।
निपाह बुखार से मरने वाले किसी भी व्यक्ति के मृत शरीर को ले जाते समय चेहरे को ढंकना महत्वपूर्ण है। मृत व्यक्ति को गले लगाने से बचें और उसके सम्‍पर्क में आने से बचें क्‍योंकि उसमें वायरस के अवशेष मौजूद होंगे। और उसके अंतिम संस्कार से पहले शरीर को स्नान करते समय सावधानी बरतें।


सिरदर्द से छुटकारा पाने के लिये अत्यंत कारगर उपाय | Best Home Remedies for Headache


Home made Remedies for Headache



आज के युग में हर कोई काम के बोझ और कई समस्याओं के चलते सर दर्द से परेशान हैं। ऐसा कई बार होता है कि तनाव और थकान के कारण सिर में ऐसा दर्द होता है कि बर्दाश्त नहीं होता है। हालांकि ऐसा कई बार गैस के कारण भी सिर में दर्द होता है, क्योंकि पेट की गैस पास न हो पाने पर बॉडी के ऊपर चढ़ती है तो यह दिल और दिमाग पर असर करती है जिसके कारण सरदर्द और चेस्ट पेन की प्रॉब्लम हो जाती है। लोग सर दर्द से तुरंत छुटकारा पाने के लिए पेनकिलर दवाओं का सहारा लेते है, जिनके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। ऐसे में दवाओं के बजाय कुछ घरेलू नुस्खे इस्तेमाल करें तो बिना किसी साइड इफेक्ट के आपको जल्द आराम मिल  सकता है। घरेलू उपचार सबसे कारगर सिद्ध होता है। 


सिरदर्द से बचने के घरेलू नुस्खे 


Remedies for Headache


* अधिक तनाव और दिन भर की भाद दौड़ की वजह से भी सिरदर्द हो सकता है। इसे दूर करने के लिए किसी अच्‍छे हर्बल तेल से अपने सिर की मालिश करवाएं। मालिश के पहले तेल का हल्‍का सा गर्म कर लें। तेल लगाते समय उंगलियों को सिर पर हल्के दबाव के साथ धीरे धीरे मालिश करें। इससे न केवल सिरदर्द दूर होगा। बल्कि इस तरह की मसाज से बालों की जड़े भी मजबूत होती हैं और बाल अच्छी तरह से बढ़ते हैं।  


* गर्म मसाला चाय सिर के दर्द के लिए एक कारगर उपाय है। आप इस चाय में एक लौंग और तुलसी के कुछ पत्ते भी डाल सकते हैं। यह चाय नींद को भगा कर दिमाग को सचेत करती है। आप इसमें थोड़े से अदरख के साथ इलायची भी मिला सकते हैं। इससे आपका सिरदर्द तो गायब होगा ही साथ में आप तरोताज़ा भी महसूस करेगें।  


* तौलिये को हल्के गर्म पानी में डालकर उस तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश कीजिए। इससे सिरदर्द में फायदा होगा। 


* मुलहठी को कूट-पीसकर महीन चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण को नाक के पास ले जाकर सूंघने से सिरदर्द में राहत मिलती है।  


* सिर के जिस हिस्से में दर्द हो रहा हो, उस तरफ वाले नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल दीजिए, उसके बाद जोर से सांसों को ऊपर की तरफ खींचिए इससे सिरदर्द से राहत मिलेगी।  


* सिरदर्द होने पर दालचीनी को पानी के साथ महीन पीसकर माथे पर पतला लेप कर लगा लीजिए। लेप सूख जाने पर उसे हटा लीजिए। 3-4 लेप लगाने पर सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।  


* अदरक पाउडर या सोंठ का एक चम्मच पाउडर लें, इसे थोड़े पानी में मिलाकर गर्म कर लें। हल्का ठंडा होने के बाद इसे माथे पर लगाएं। सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।

12 Helpful Tips For Doing Thyroid Remedies | थायरॉइड को जड़ से खत्म कर देगा ये आसान घरेलू उपाय


थायराइड संबंधी समस्याएं और उपचार - Thyroid



थायरॉयड महिलाओं में होने वाला सबसे आम हार्मोन असंतुलन है। इसका कम या ज्यादा होना दोनों ही व्यक्ति के शरीर के लिए बीमारी का कारण है। अगर हार्मोन कम होने लगता है, तो आपके शरीर का मेटाबोलिज्म बहुत तेज हो जाता है और आपकी ऊर्जा बहुत जल्दी खर्च हो जाती है। अगर बढ़ जाए, तो शरीर की मेटाबोलिज्म प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में शरीर में ऊर्जा बननी कम हो जाती है और थकान तथा सुस्ती बढ़ जाती है।
थायरॉयड एक तरह की ग्रंथि होती है, जो तितली के आकार का होता है एवं गले में बिल्कुल सामने की ओर होती है। यह ग्रंथि आपके शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रित करती है। यानी जो भोजन हम खाते हैं यह उसे ऊर्जा में बदलने का काम करती है। इसमें से थायराइड हार्मोन का स्राव होता है जो हमारे मेटाबालिज्म की दर को संतुलित करता है. थॉयराइड ग्रंथि, ऊर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है जो ऐसे जीन्स का स्राव करती है जिससे कोशिकाएं अपना कार्य ठीक प्रकार से करती हैं और इसलिए यह एक तरह से मास्टर लीवर है. इस ग्रंथि के सही तरीके से काम कर पाने के कारण कई तरह की समस्याएं भी पैदा होती हैं।

थायराइड की समस्या दो प्रकार की होती है. एक तो हाइपोथॉयराइडिज्म और दूसरी हाइपरथॉयराइडिज्म होती है. चलिए आपको इनके बारे में विस्तार से बताते है.

जब थॉयराइड ग्रंन्थि से अधिक हॉर्मोन बनने लगे तो हाइपरथॉयरॉइडिज्म और जब कम हार्मोन बनने लगे तो ये हाइपोथायरॉइडिज्म होता है. हाइपोथायरॉइडिज्म में शरीर का वजन बढऩे लगता है, भूख कम लगती है जोड़ों में दर्द रहता है, हाथ पैरों में सूजन आने लगती है, कब्ज़ होने लगती है और ठण्ड ज्यादा लगती है. हाइपरथायरॉउडिज्म में weight कम होने लगता है, बार बार भूख लगने का अहसास होता है, पसीना अधिक आता है और हाथों पैरों में कपकपी होने लगती है.




थायराइड



थायराइड के लक्षण.   



हार्मोनल बदलाव.. 

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान थाइरॉइड की स्थिति में पेट में दर्द अधिक रहता है. वैसे आपको बता दे कि हाइपरथाइरॉइड में अनियमित पीरियड्स रहते ही हैं. इसके इलावा थाइरॉइड की स्थिति में गर्भ धारण करने में भी दिक्कत हो सकती है.


मोटापा..

हाइपोथाइरॉइड की स्थिति में अक्सर तेजी से वजन बढ़ता है. इतना ही नहीं इससे शरीर में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ जाता है. तो वहीं हाइपरथाइरॉइड की स्थिति में कॉलेस्ट्रॉल बहुत कम हो जाता है.


थकान, अवसाद या घबराहट.. 

अगर अधिक मेहनत किए बिना ही आप थकान महसूस करते हैं या छोटी छोटी बातों पर आपको घबराहट होती है तो इसकी वजह थाइरॉइड हो सकती है.


मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द.. 

हाइपोथाइरॉडड यानि शरीर में टीएसएच अधिक और टी थ्री, टी फोर कम होने पर मांसपेशियों और जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है.


गर्दन में सूजन.. 

थाइरॉइड बढऩे पर गर्दन में सूजन की संभावना भी बढ़ जाती है. इसलिए यदि गर्दन में सूजन या भारीपन का एहसास हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.


बालों और त्वचा की समस्या.. 

इसके इलावा हाइपोथाइरॉइड की स्थिति में त्वचा में रूखापन, बालों का झडऩा, भौंहों के बालों का झडऩा जैसी समस्याएं होती हैं. जबकि हाइपरथाइरॉइड में बालों का तेजी से झडऩा और संवेदनशील त्वचा जैसे लक्षण दिखाई देते है.


पेट खराब होना.. 

गौरतलब है, कि लंबे समय तक कान्सटिपेशन की समस्या हाइपोथाइरॉइड में होती है. जब कि हाइपरथाइरॉइड में डायरिया की दिक्कत बार बार होती है.


इसके इलावा थॉयराइड की समस्या होने पर थकान, आलस, कब्ज का होना, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक ठंड लगना, भूलने की समस्या, वजन कम होना, तनाव और अवसाद जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. थाइरॉइड हमारे शरीर की कार्यपद्धति मे बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके इलावा शरीर में होने वाली मेटाबॉलिज्म क्रियाओं में थाइरॉइड ग्रंथि से निकलने वाले थाइरॉक्सिन हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

थायराइड से बचने के घरेलू उपाय.


थायराइड के रोगी को इलाज के घरेलू नुस्खे और उपाय करने के साथ साथ इस बात की जानकारी होनी जरुरी है की उसे अपने आहार में क्या खाना चाहिए और क्या ना खाये. इसके इलावा थाइराइड के रोग में डाइट चार्ट का पालन करने के साथ साथ नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग भी करना चाहिए.
थायराइड की दवा नियमित और सही समय पर लेने से आपका वजन नहीं बढ़ता। कुछ लोग थायराइड की समस्यां को मामूली समझ कर इग्नोर कर देते है। इसमें दी जाने वाली एंडरएक्टिव दवाओं से वजन कम करने में मदद मिलती है। इसलिए इनका सेवन जरुर करें।


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आहार.

ऐसे आहार जिनमें आयरन और कॉपर पर्याप्त मात्रा में हो, इनके सेवन से थायराइड के फंक्शन में मदद मिलती है. बादाम, काजू और सूरजमुखी के बीजों में कॉपर और हरी पत्तेदार सब्जियों में आयरन भरपूर मात्रा में होता है. कम वसा वाली दही का सेवन थायराइड के रोगी के लिए फायदेमंद है.


आँवला चूर्ण और शहद.

आपको लग रहा होगा कि आँवला, चूर्ण और शहद तो साधारण सी चीजे है, लेकिन आपको बता दे कि अभी तक थायराइड से ग्रसित जितने भी रोगी थे उनको यही उपाय बताया गया और उन्हें सौ प्रतिशत इसका परिणाम भी अच्छा मिला है. इसका असर 15 दिनों में ही आपको महसूस होने लगेगा. आप सुबह उठते ही खाली पेट एक चम्मच शहद और ध्यान रहे कि ऑर्गेनिक शहद कम से कम 10 ,15 ग्राम शहद मिक्स कर के ऊँगली से चाटे.ये प्रक्रिया रात को खाना खाने के 2 घंटे बाद या सोते वक़्त भी दोहराएं. ये बेहद आसान उपाय तो है ही और साथ ही ये आपके लिए कारगर भी सिद्ध होगा.

अश्वगंधा.

शहद के इलावा अश्वगंधा भी चमत्कारी दवा के रूप में कार्य करता है. अश्वगंधा का सेवन करने से थायराइड की अनियमितता पर नियंत्रण होता है. साथ ही अश्वगंधा के नियमित सेवन से शरीर में भरपूर ऊर्जा बनी रहती है और कार्यक्षमता में भी वृद्धि होती है.


समुद्री घास.

समुद्री घास भी थाइरॉइड ग्रंथि को नियमित बनाने के लिए एक रामबाण दवा की तरह काम करती है. समुद्री घास के सेवन से शरीर को मिनरल्स और आयोडीन मिलता है. इसलिए समुद्री घास का सेवन इस बीमारी में लाभदायक होता है. इसके इलावा इससे मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट भी स्किन को जवान बनाएं रखते हैं.

नींबूं की पत्तियां.

नींबू की पत्तियों का सेवन थाइरॉइड को नियमित करता हैं. दरअसल मुख्य रूप से इसका सेवन थाइरॉक्सिन के अत्याधिक मात्रा में बनने पर रोक लगाता है. साथ ही इसकी पत्तियों की चाय बनाकर पीना भी इस बीमारी में रामबाण औषधि का काम करती है.

ग्रीन ओट्स.

थाइरॉइड में ग्रीन ओट्स एक नेचुरल औषधि की तरह कार्य करते है. ये शरीर में हो रही थाइरॉक्सिन की अधिकता और उसके कारण हो रही समस्याओं को मिटाते है.

अखरोट.

अखरोट इस बीमारी के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. गौरतलब है कि अखरोट में सेलेनियम नामक तत्व पाया जाता है जो थॉयराइड की समस्या के उपचार में फायदेमंद है. सेलेनियम थॉयराइड से सम्बंधित अधिकांश एंजाइम्स का एक प्रमुख घटक द्रव्य है, जिसके सेवन से थॉयराइड ग्रंथि सही तरीके से काम करने लगती है. यह ऐसा आवश्यक सूक्ष्म तत्व है जिस पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सहित प्रजनन आदि अनेक क्षमतायें भी निर्भर करती है. अखरोट के सेवन से थॉयराइड के कारण गले में होने वाली सूजन को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है. अखरोट से सबसे अधिक फायदा हाइपोथॉयराइडिज्म की स्थिति में मिलता है. अखरोट के इलावा सेलेनियम बादाम में भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है.


नमक का सेवन बढ़ाना और व्यायाम करना.

थॉयराइड ग्रंथि की समस्या होने पर नमक का सेवन बढ़ा देना चाहिए. इसके इलावा स्वस्थ खानपान और नियमित रूप से व्यायाम को अपनी दिनचर्या में जरूर अपनाएं.


धनिये का प्रयोग.

थाइरॉइड के लिए हरे पत्ते वाले धनिये की ताजा चटनी बना कर एक बडा चम्मच एक गिलास पानी में घोल कर रोजाना पीए. इससे आप एक दम ठीक हो जाएंगे.

उज्जायी प्राणायाम.

इस उपाय में पद्मासन या सुखासन में बैठकर आँखें बंद कर लें. फिर अपनी जिह्वा को तालू से सटा दें. अब कंठ से श्वास को इस प्रकार खींचे कि गले से ध्वनि और कम्पन उत्पन्न होने लगे. इस प्राणायाम को दस से बढाकर बीस बार तक प्रतिदिन करें. प्राणायाम प्रात नित्यकर्म से निवृत्त होकर खाली पेट करें.


एक्युप्रेशर चिकित्सा.

एक्युप्रेशर चिकित्सा के अनुसार थायरायड और पैराथायराइड के प्रतिबिम्ब केंद्र दोनों हांथो और पैरों के अंगूठे के बिलकुल नीचे और अंगूठे की जड़ के नीचे ऊँचे उठे हुए भाग में स्थित होते हैं. थायरायड के हाइपोथायरॉइडिज्म की अवस्था में इन केन्द्रों पर घडी की सुई की दिशा में अर्थात बाएं से दायें तरफ प्रेशर दें तथा हाइपरथॉयरॉइडिज्म की स्थिति में प्रेशर दायें से बाएं देना चाहिए.

इसके साथ ही पीयूष ग्रंथि के भी प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर प्रेशर देना चाहिए. प्रत्येक केंद्र पर एक से तीन मिनट तक प्रतिदिन दो बार प्रेशर दें. पीयूष ग्रंथि के केंद्र पर पम्पिंग विधि से प्रेशर देना चाहिए. इससे आपका थायराइड बिलकुल सही हो जाएगा.


नियमित व्यायाम.

इस बीमारी के कारण बढ़ रहें मोटापे को कम करने के लिए नियमित व्यायाम करें। सप्ताह में कम से कम पांच दिन तीस मिनट रोज व्यायाम या स्विमिंग करने से आपका मोटापा गायब हो जाएगा।

जूस पीना.

थायराइड में चाय का अधिक सेवन करने से भी मोटापा बढ़ जाता है। इसके बजाए आप रोजाना चुकंदर, अनानास और सेब से बना जूस पी सकते है। रोजाना इसे पीने से आपका मोटापा भी कम हो जाएगा और आपको एनर्जी भी मिलेगी।
इसके अलावा आप चाहे तो एक जूस तैयार कर सकते हैं इसे लिए आपको दालचीनी पाउडर, अजवाइन पाउडर और मेथी पाउडर सभी को मिलाकर चूर्ण बना लें और इसे एक चम्मच रोज गर्म पानी में मिलाकर पीने से थॉयराइड की समस्या से निजात मिलेगा।