Sunday, 31 December 2017

तुम

इस दिल का अरमान हो तुम,
मेरे जीवन की मुस्कान हो तुम,
करे न क्यों खुद पर वो गुमान,
जिसके धड़कन की तुम हो पहचान ।

जीने की अभिलाषा तुम,
इस जीवन की हर आशा तुम,
जिंदगी की चाहत में तुम,
मेरे कदमो की आहट में तुम ।

तुममें ही मेरी साँस है बसती,
तुमसे जीने की आस है मिलती,
तुम्हे सदा मिलती रहे 'तृप्ति' ,
मेरे दिल की यही है अभिव्यक्ति ।

                    --तृप्ति श्रीवास्तव

No comments:

Post a Comment